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People write diaries. Their diaries describe their personality. I write on my blog. It describes me way too well. :D
My writing takes me places my mind never wanted to go
Everyone writes. From the ink of their thoughts, by the pen of their mind on the page of their face. Everyone writes.I love to write. It is a passion; a compulsion; something that gives me an avenue to express myself. I write when I am happy; when I am sad or when an issue touches my heart. I find inspiration to write in every aspect of life.
This blog is dedicated to anything and everything that fills my thoughts and occupies cranial space

Saturday, June 30, 2018

तुम‌ और मेरी कविता

तुम कविता नहीं थी
तो मैं भी‌ कौन सा कवि था?
तुम कोई लहर नहीं थी
तो मैं भी कोई सागर नहीं था।
तुम कोई नीर नहीं थी
तो मैं भी कहाँ प्यासा था?
तुम कोई रंग नहीं थी
तो मैं कोई रंगरेज़ कहाँ?
तुम बस इक स्वप्न-सी,
तुम बस इक नज़्म-सी,
तुम बस इक सुर-सी,
तुम बस थी कोई हवा सूखी-सी,
तुम तो बस थी इक नमी-सी,
इक ख़ामोश इरादों-सी,
इक घिरते घनश्याम-सी,
इक महकती रातरानी-सी,
बस थी इक कहानी-सी।
आज तुम हो बस किताबों में,
तुम हो बस चन्द नमाज़ों में,
इक शोर-सी थी तुम,
मन का चोर-सी थी तुम।
मैं आज भी‌ तुम्हें सुलझाता हूँ।
थी इक पहेली-सी तुम,
कुछ छोड़ गयी हो मुझमें
जो तुम्हें हर ज़िक्र में छेड़ देता हूँ।
फिर भी मैं ये कहता हूँ,
"तुम कौन सी मेरी कविता थी?"

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